क्या इस देश में कोई कानून व्यवस्था है या इसके नियामक ही इसके खिलाफ हैं . अख़बार में कुछ दिनों से आ रहा था कि केंद्र सरकार नक्सलवादियों के खिलाफ एक वृहत अभियान छेड़ने जा रही है . यकायक पढने को मिला कि एक पैकेज जारी हो गया है कि जो इस रस्ते को छोडेगा, उसे २ लाख की FD और एक नियमित रोजगार या रकम मिलती रहेगी .
क्या मिसाल हम रख रहे हैं इस देश के युवा वर्ग के सामने कि कानून तोड़ो हत्या करो और उपहार पाओ . कब तक ऐसा दोहरा व्यवहार होता रहेगा इस देश की जनता के साथ ? कश्मीर में यही हुआ और अब सारे देश में होने जा रहा है . पाकेटमार को सजा और हत्यारे को इनाम ! छोटे छोटे अपराधों में अनगिनत लोग इस देश की जेलों में सड़ रहे हैं . लेकिन संगठित अपराधियों को पुरस्कार वाह भाई वाह ? क्या सन्देश दे रहे हैं हम युवा वर्ग को कि संगठित अपराध की दुनिया में उतरो . धन और सामर्थ्य इकठ्ठा करो और फिर उपहार के साथ रिहाई !
क्या इसके पीछे कोई बहुत बड़ा अंतर्राष्ट्रीय दबाव है ? सरकार को अपनी इस नीति के बारे में खुल कर जवाब देना चाहिए और अगर ऐसा ही है तो अपनी कानून व्यवस्था बदल कर आम जनता को खुद अपराध से लड़ने के लिए छोड़ देना चाहिए .

---------------------------

डॉo महेश सिन्हा द्वारा प्रेषित ये पोस्ट पहला एहसास से ली गई है।