ओलम्पिक का सफरनामा-4



1908 में होने वाले ओलम्पिक का आयोजन पहले रोम में होना था किंतु रोम ने पर्याप्त तैयारी न होने के कारण इसका आयोजन करने से मना कर दिया था। इस वजह से इस बार के ओलम्पिक का आयोजन इटली के स्थान पर लन्दन में हुआ।

पहली बार

इन ओलम्पिक आयोजनों में पहली बार सभी देशों ने मार्च-पास्ट करते हुए अपने-अपने झंडों के साथ स्टेडियम में प्रवेश किया।

विशेष

ओलम्पिक स्पर्धा जीतने वाले एथलीटों को पदक के अतिरिक्त एक डिप्लोमा भी दिया गया। जिसको मशहूर कलाकार बर्नार्ड पैट्रिग ने तैयार किया था.

मैराथन

लन्दन ओलम्पिक आयोजन समिति ने मैराथन की दौड़ की तय दूरी में 195 मीटर और जोड़ दिए। इसकी वजह विंडसर कैसल से स्टेडियम में मौजूद रोयल बॉक्स की दूरी माना गया. यह दूरी 42 किमी से ज्यादा हो रही थी. इस कारण से मैराथन में अतिरिक्त दौड़ करवाई गई.

दो देश एक साथ

इस ओलम्पिक में आस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड ने अलग-अलग भाग न लेकर एक साथ, संयुक्त रूप से आस्ट्रेलेशिया के झंडे तले भाग लिया था.

ओलम्पिक का सफर-3

तीसरा ओलम्पिक अपनी उपलब्धियों के लिए कम, अपनी गड़बडियों के लिए अधिक जाना जाता रहा है। यह आयोजन साढ़े चार माह तक चला था.

पहली बार

इस ओलम्पिक में पहली बार किसी भी एथलीट को स्वर्ण पदक प्रदान किया गया।

मैराथन धावक लेन तू और जैमिनी मिशेनी ओलम्पिक में भागीदारी करने वाले पहले अश्वेत खिलाड़ी बने।

ओलम्पिक मेले का प्रचार करने के लिए पहली बार पोस्टरों का उपयोग किया गया. इन पोस्टरों में स्टेडियम को केन्द्र में रख कर इनकी रचना की गई थी.

अद्भुत फर्राटा चैम्पियन

अमरीकी एथलीट आर्ची हान ने साठ, सौ और दो सौ मीटर की फर्राटा दौड़ में अव्वल स्थान प्राप्त किया। 200 मीटर रेस में 21.6 सेकंड का उनका रिकार्ड 28 साल बाद टूटा था.

जीवट का धनी

अमेरिकी एथलीट जोर्ज आइसर को सबसे अधिक लोकप्रियता प्राप्त हुई। उसका कारण था उनके एक पैर से विकलांग होने के बाद भी पैरलल बार, रोप क्लैम्बिंग और वाल्ट में तीन स्वर्ण सहित कुल सात पदक जीतना. उनका एक पैर लकडी का था.

कमाल

अमेरिका के राल्फ रोज ने कुल तीन पदक जीते. एक पहले स्थान के लिए शाट पुट में, एक दूसरे स्थान के लिए डिस्कस थ्रो में और एक पदक तीसरे स्थान के लिए हैमर थ्रो में.

ओलम्पिक का सफर

विशेष
ओलम्पिक में वर्ष 1900 में पहली बार महिलाओं को शामिल होने का अवरस मिला। पेरिस में आयोजित हुए इस ओलम्पिक में 22 महिलाओं ने पहली बार ओलम्पिक भागीदारी की.
पहली महिला विजेता
ग्रेट ब्रिटेन की चार्ल्स कूपर ने टेनिस स्पर्धा जीत कर पहली महिला ओलम्पिक बनने का श्रेय प्राप्त किया। उस समय पहले स्थान वाले को स्वर्ण पदक न दिया जाने के कारण उन्हें भी स्वर्ण के स्थान पर रजत पदक दिया गया था.
उस समय ओलम्पिक में पहले स्थान वाले को रजत तथा दूसरे स्थान वाले को कांस्य पदक दिया जाता था।
कुल प्रतिभागी
इस दूसरे ओलम्पिक में 95 स्पर्धाओं के लिए 24 देशों के कुल 997 एथलीटों ने भागीदारी की थी। इस ओलम्पिक में मेजबान फ्रांस की टीम ने 26 पदक जीत कर पहला स्थान तथा अमेरिका ने 18 पदक जीत कर दूसरा स्थान प्राप्त किया था.
मील का पत्थर
पेशे से डेंटिस्ट एल्विन ने ओलम्पिक में पहली बार चार पदक जीते. उन्हों ने 60 मीटर स्प्रिंट, 110 मीटर और 200 मीटर बढ़ा दौड़ के अतिरिक्त लम्बी कूद में भी जीत हासिल की थी. एकल स्पर्धाओं में उनका यह रिकार्ड आज तक कायम है. छः रिकार्ड कायम करने के बाद उन्हों ने संन्यास ले लिया.

ओलम्पिक का सफरनामा

ओलम्पिक 1896 सुखद शुरुआत

हम सब जानते हैं कि आधुनिक ओलम्पिक की शुरुआत 1896 में हुई थी. इस तथ्य के बाद भी एक मिथक को ज्यादा मान्यता प्राप्त है कि हेरावालेस ने अपने पिता की याद में ओलंपिया (यूनान) में इस खेल की शुरुआत की थी। खेल होते रहे, रुकते रहे....................सन 1859 में इवेंगोलास ने पैसा उपलब्ध कराकर फ़िर से ओलम्पिक की शुरुआत कराई. सन 1870 और सन 1875 में टूर्नामेंट होने के बाद यह लगातार जारी नहीं रह सका.

आधुनिक ओलम्पिक की शुरुआत

कहा जाता है कि फ्रांस के पियारे दी कुबर्तिन ने ओलम्पिक को नए सिरे से शुरू करने का बीडा उठाया. उन्हों ने 1894 में अंतर्राष्ट्रीय ओलम्पिक समिति का गठन कर 1896 में एथेंस (यूनान) से इन खेलों के आयोजन की परम्परा शुरू की. 06 अप्रैल से लेकर 15 अप्रैल तक चले पहले ओलम्पिक में 14 देशों के 241 एथलीटों ने भाग लिया था.

मशाल

पहले आयोजन में मशाल पूरे समय तक नहीं जलाई गई थी, इस परम्परा कि शुरुआत सन 1928 से एम्सटरडम में शुरू हुई।

पहला पदक

ओलम्पिक का पहला पदक अमेरिका के जेम्स कोनोली को ट्रिपल जम्प में मिला था। वह ओलम्पिक का पहला पदक पाने वाले एथलीट बने. उस समय प्रथम को स्वर्ण पदक न दिए जाने के कारण इन्हें भी स्वर्ण न देकर रजत दिया गया था.

पहले ओलम्पिक का मैराथन चैम्पियन

यह दौड़ यूनान के स्पायार्दन लुईस ने जीती थी. आश्चर्य की बात है कि लुईस पेशे से चरवाहा था. इस दौड़ के एतिहासिक महत्व होने के कारण यूनान इसे हर हाल में जीतना चाहता था. लुईस ने यह रेस सात मिनट और चार किलोमीटर के फासले से जीती.

नया जनमत संग्रह शुरू

आरक्षण की हवा देश को हमेशा गर्म बनाये रखती है. इस गरमी में कई होनहार जल कर भस्म हुए, कई जरूरतमंद अपनी मंजिल न पा सके. राजनीती के खेल ने अच्छी-भली सूरते-हाल को बिगाड़ कर रख दिया है. क्रीमी लेयर के नाम पर एक बार फ़िर आरक्षण की आग हमारे चारों तरफ़ सुलग रही है. आप भी इस आग की तपिश महसूस करें इस जनमत के द्वारा, जो शुरू हुआ है हमारे सभी ब्लॉग पर एक साथ, आपकी राय जानने के लिए.पोल यहाँ-यहाँ है-
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